रेत की लहरों में गूंजे स्वतंत्रता के गीत : नेताजी की रेत कला पर मोदी जी हुए अभिभूत

रेत की लहरों में गूंजे स्वतंत्रता के गीत : नेताजी की रेत कला पर मोदी जी हुए अभिभूत

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भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज ओडिशा के कोणार्क तट पर बनाई गई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अदभुत रेत कला की सराहना की। प्रख्यात रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पट्टनायक द्वारा निर्मित इस कृति ने प्रधानमंत्री को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने इसे "रेत की लहरों में गूंजते स्वतंत्रता के गीत" बताया।

आज 23 जनवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मोदी ने इस विशाल रेत मूर्ति का अनावरण किया, जिसमें नेताजी का दृढ़ व्यक्तित्व और आजादी के प्रति उनकी अदम्य जुनून बखूबी दर्शाया गया था। रेत से निर्मित ये 50 फीट की मूर्ति नेताजी को दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए दिखाती है, उनके हाथों में तिरंगा लहरा रहा है और आंखों में भारत को स्वतंत्र बनाने का सपना झिलमिला रहा है। पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण क्षणों का रेखांकन किया गया है, जिसमें युवा क्रांतिकारी का जोश और समर्पण साफ तौर पर झलकता है।

प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा, "यह रेत कला की कृति केवल कला नहीं, बल्कि इतिहास का साक्षी है। सुदर्शन पट्टनायक ने रेत के कणों से नेताजी के बलिदान और भारत की स्वतंत्रता की गाथा इतनी खूबसूरती से उकेरी है कि यह न केवल आंखों को सुख देती है, बल्कि हमारे दिलों को भी जगाती है।" उन्होंने आगे कहा, "नेताजी का जीवन त्याग, दृढ़ संकल्प और देशप्रेम की एक अमर कहानी है। हमें उनकी अविस्मरणीय विरासत को संजोना चाहिए और उनके आदर्शों पर चलकर भारत को सशक्त बनाना चाहिए।"

इस आयोजन में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और राज्य के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं और रेत कला उनमें से एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने पद्मश्री सुदर्शन पट्टनायक के योगदान की भी सराहना की, जिन्होंने रेत कला को विश्व पटल पर एक अलग पहचान दिलाई है।

पद्मश्री सुदर्शन पट्टनायक ने इस अवसर पर कहा कि नेताजी के जीवन और विचारों से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा, "मैंने इस कृति को बनाते हुए हर कण में नेताजी के स्वतंत्रता के संघर्ष और देश के प्रति अनंत समर्पण को समाहित करने की कोशिश की है। मेरी यह उम्मीद है कि यह कलाकृति लोगों को नेताजी के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।"

इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने भी जमकर तालियां बजाकर इस कलाकृति की सराहना की। कई लोगों ने बताया कि यह रेत कला देखकर उन्हें नेताजी के संघर्ष की याद ताजा हो गई और उनके मन में देश के प्रति गौरव का भाव जागृत हुआ।

यह कार्यक्रम न केवल ओडिशा के कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। रेत की लहरों पर उभरी नेताजी की छवि हमें स्वतंत्रता के संघर्ष और सपनों की याद दिलाती है, साथ ही हमारे कर्तव्यों के प्रति हमें जागरूक करती है। यह रेत कला की कृति एक अस्थायी कलाकृति भले ही हो, लेकिन इससे मिलने वाली प्रेरणा और देशभक्ति का ज्वार भारत के युवाओं के मन में सदैव बहता रहेगा।

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