नौ साल की मासूमियत पर दाग, Ayesha की जुबान से छलका दर्द - "उसने धक्का दिया, फिर..."

नौ साल की मासूमियत पर दाग, Ayesha की जुबान से छलका दर्द - "उसने धक्का दिया, फिर..."

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धूप खिली हुई थी, हवा में थोड़ी ठंडक थी, लेकिन नौ साल की Ayesha के छोटे से दिल में तूफान उठा हुआ था। उसके चेहरे पर मासूमियत और डर का ऐसा मेल था, जो देखने वाले की रूह तक कंपा देता था। स्कूल से लौटते वक्त एक सुनसान गली में उसका रास्ता एक दानव से क्रॉस हुआ था, जिसने उसकी जिंदगी में कभी न मिटने वाला जख्म दे दिया।

Ayesha की बयानी सुनी तो कलेजे में ठंड लग जाती है। वो बताती है, "वो गली सुनसान थी, बस मैं ही जा रही थी। अचानक पीछे से किसी ने मुझे धक्का दिया। मैं गिर पड़ी। तभी मैंने उसकी आवाज सुनी। उसने डरावनी हंसी हंसते हुए कहा, 'अब देख तेरा क्या होता है।'"

डर के मारे Ayesha की आवाज कांप रही थी। उसकी आंखों में वो खौफ झलक रहा था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वो आगे बताती है, "मैंने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया। मैंने मदद के लिए पुकारा, लेकिन सुनसान गली में मेरी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। उसने..." Ayesha यहीं रुक जाती है, उसकी आवाज फंस जाती है। वो सिसकियां लेने लगती है। उसकी मासूमियत पर हुए अत्याचार को उसकी जुबान ही बयां कर सकती है।

Ayesha के माता-पिता का चेहरा भी उसी दर्द से तमतमाया हुआ था। उनकी आंखों में बेबसी और गुस्से का ऐसा समंदर उमड़ रहा था, जिसे रोकना मुश्किल था। माँ बेसुध होकर रो रही थी, तो पिता का शरीर गुस्से से कांप रहा था। वो बोलते हुए लड़खड़ा रहे थे, "हमारी बेटी के साथ... ऐसी हैवानियत करने वाले को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम इंसाफ चाहते हैं, उसके दर्द का मरहम चाहते हैं।"

Ayesha के मामले ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। हर कोई इस जघन्य अपराध की निंदा कर रहा है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन Ayesha के जख्म इतनी आसानी से नहीं भरेंगे। उसके बचपन की मासूमियत पर जो दाग लगा है, वो उसे जिंदगी भर सताता रहेगा।

सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक हमारी बेटियां असुरक्षित रहेंगी? कब तक उन्हें घर से बाहर निकलते हुए डर सताएगा? कब तक उन्हें रास्ता चलते हुए हर अनजान शख्स पर शक करना पड़ेगा? ये सवाल सिर्फ Ayesha के लिए नहीं, बल्कि हर उस मां-बाप के लिए है, जिनकी बेटियां इस दुनिया में सांस लेती हैं।

जरूरत है समाज में जागरूकता लाने की। हमें अपनी बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने होंगे। उन्हें ये समझाना होगा कि ये उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि समाज की बीमारी है। और सबसे बड़ी जरूरत है सख्त कानून और उनके तेजी से क्रियान्वयन की। तभी हमारी बेटियां इस तरह के दरिंदों से खुद को बचा पाएंगी, तभी वे बिना किसी डर के अपने सपनों को पूरा कर पाएंगी।

Ayesha का दर्द सिर्फ उसकी कहानी नहीं है, ये हजारों बेटियों की कहानी है। हमें इसे अनसुना नहीं कर सकते। हमें इस जघन्य अपराध के खिलाफ आवाज उठानी होगी। हमें सुनिश्चित करना होगा कि Ayesha के साथ जो हुआ, वो किसी और के साथ न हो। तभी हम कह पाएंगे कि हम एक सभ्य समाज हैं,

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