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हनुमान ध्वज विवाद: कर्नाटक के गांव में तनाव, राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप

- Ashish Pahwa

कर्नाटक के मांड्या जिले के केरागोडु गांव में रविवार को हनुमान ध्वज हटाए जाने के बाद तनाव फैल गया है। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

जानकारी के मुताबिक, केरागोडु गांव में एक 108 फुट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर हनुमान ध्वज फहराया गया था। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने रविवार को ध्वज को हटा दिया। इस कार्रवाई के विरोध में गांव के लोगों ने प्रदर्शन किया और सड़कों को जाम कर दिया। पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

इस घटना के बाद भाजपा और जनता दल सेक्युलर (जद-एस) के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि ध्वज हटाने की कार्रवाई सरकार के निर्देश पर की गई है। वहीं, जद-एस ने कहा कि ध्वज हटाने का फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया था।

इस मामले पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि ध्वज हटाने का फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया था।

हनुमान ध्वज विवाद के बाद कर्नाटक में तनाव बढ़ने की आशंका है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी संख्या में बल तैनात किया है।

विवाद का इतिहास

हनुमान ध्वज विवाद का इतिहास काफी पुराना है। इस विवाद की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब कर्नाटक के बेंगलुरु में एक स्कूल में हनुमान ध्वज फहराया गया था। इस मामले में भी विवाद हुआ था और पुलिस ने हनुमान ध्वज को हटा दिया था।

इसके बाद से हनुमान ध्वज विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा और जद-एस जैसे हिंदू राष्ट्रवादी दल हनुमान ध्वज को हिंदू धर्म का प्रतीक बताते हुए इसे फहराने का अधिकार मांगते हैं। वहीं, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग हनुमान ध्वज को सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का एक जरिया बताते हैं।

विवाद के पीछे कारण

हनुमान ध्वज विवाद के पीछे कई कारण हैं। एक कारण यह है कि कर्नाटक में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस तनाव को बढ़ावा देने के लिए कुछ हिंदू राष्ट्रवादी संगठन हनुमान ध्वज विवाद का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दूसरा कारण यह है कि कर्नाटक में भाजपा सत्ता में है। भाजपा एक हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी है। पार्टी के नेता अक्सर हिंदू धर्म के प्रतीक के रूप में हनुमान ध्वज का इस्तेमाल करते हैं। इससे हनुमान ध्वज विवाद और बढ़ रहा है।

विवाद के संभावित परिणाम

हनुमान ध्वज विवाद के संभावित परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं। इस विवाद के कारण कर्नाटक में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। इससे हिंसा की भी संभावना बढ़ सकती है।

इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों समुदायों के बीच संवाद और समझौता जरूरी है। सरकार को भी इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।